Sunday, September 12, 2010

ghazal

है समंदर आसमानी क्यों भला
हर तरफ है पानी पानी क्यों भला

मुफलिसों को फ़िक्र है इस बात की
हो रही बेटी सयानी क्यों भला

फिर रही है दर ब दर बिन लक्ष्य के
ठोकरें खाती जवानी क्यों भला

कुछ चुनिन्दा लोगों पर ही हो रही
वक़्त की है मेहरबानी क्यों भला

होंठ तेरे देख कर आया समझ
हो गया ख़त जाफरानी क्यों भला

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