Thursday, February 27, 2014

ghazal

टिमटिमाना क्या सितारों की तरह 
हम तो जलते हैं चिरागों की तरह...
आपकी आँखों में बस जाएंगे हम 
देखिये हम को नज़ारों की तरह ...
कौन क्या है,सब पता चल जाएगा 
चेहरों को पढ़िये किताबों की तरह...
हम घिरे रहते हैं खारों से मगर
हम महकते हैं गुलाबों की तरह ...
जिंदगी बन जाये खुशबू का सफर
तुम चले आओ फज़ाओं की तरह .....
वो होगा जो कभी न हुआ, देखते रहो 
इक दिन खुलेगा बाबे वफा, देखते रहो ...
जो शख्स मुझ से रूठ गया है वो दोस्तो
आएगा मुसकुराता हुआ, देखते रहो....
ज़िंदाने ग़म में जिसने मुझे कैद कर दिया 
वो ही करेगा मुझ को रिहा , देखते रहो...
अशकों से कैसे बनते हैं मेरी ग़ज़ल के शेर
लिक्खेगी मेरी नोके मिज़ा देखते रहो ...
फूलों में कौन भरता है ये रंगो बू अजय
इंसान है कोई या खुदा , देखते रहो....