Sunday, June 4, 2017

पर्यावरण बचाओ

आज इस वातावरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
इस क्षरित पर्यावरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
दौड़ते रहते हैं हरदम स्वर्ण मृग के पीछे ही
अपनी ख़ुशियों के हरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
हमने भूमि वायु जल सब कुछ विषैला कर दिया
इस बदलते आवरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
हम ने ख़ुद अपने ही हाथों से उजाड़े हैं चमन
खुशबू ए गुल के मरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
देख कर अपने बड़ों को ही तो बच्चे सीखते
बच्चों के इस आचरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद
ज़िंदगी की बह्र क्या हो,क्या रदीफ़ो क़ाफ़िया
इस ग़ज़ल के व्याकरण के हम हैं ज़िम्मेदार ख़ुद

Wednesday, May 3, 2017

ग़ज़ल

दरमियाँ के फासले सब मिट गए
गुफ्तगू से मसअले सब मिट गए
साथ जब ले कर चला माँ की दुआ
मुश्किलों के जलजले सब मिट गए
आ गयी है उम्र ऐसे मोड़ पर
झूठे सच्चे चोंचले सब मिट गए
फेसबुक पर दब गया ऐसा बटन
यार जो थे दोगले सब मिट गए
इक मुक़द्दर का लिखा न मिट सका
और बाकी फैसले सब मिट गए
एक उड़ती सी खबर ये आई है
यू पी से अब मनचले सब मिट गए