Sunday, September 12, 2010
ajayagyat poetry ghazals: ghazal
ajayagyat poetry ghazals: ghazal: "है समंदर आसमानी क्यों भला हर तरफ है पानी पानी क्यों भला मुफलिसों को फ़िक्र है इस बात की हो रही बेटी सयानी क्यों भला फिर रही है दर ब दर बिन ..."
ghazal
है समंदर आसमानी क्यों भला
हर तरफ है पानी पानी क्यों भला
मुफलिसों को फ़िक्र है इस बात की
हो रही बेटी सयानी क्यों भला
फिर रही है दर ब दर बिन लक्ष्य के
ठोकरें खाती जवानी क्यों भला
कुछ चुनिन्दा लोगों पर ही हो रही
वक़्त की है मेहरबानी क्यों भला
होंठ तेरे देख कर आया समझ
हो गया ख़त जाफरानी क्यों भला
हर तरफ है पानी पानी क्यों भला
मुफलिसों को फ़िक्र है इस बात की
हो रही बेटी सयानी क्यों भला
फिर रही है दर ब दर बिन लक्ष्य के
ठोकरें खाती जवानी क्यों भला
कुछ चुनिन्दा लोगों पर ही हो रही
वक़्त की है मेहरबानी क्यों भला
होंठ तेरे देख कर आया समझ
हो गया ख़त जाफरानी क्यों भला
Thursday, September 9, 2010
shayari
हमकदम बन कर चलो तुम साथ मेरे
दमबदम हाथों में ले कर हाथ मेरे
हम कदम हो आप सा जो ज़िन्दगी की राह में
मंजिलों को छोड़ पीछे तय सफ़र करता रहूँ
दमबदम हाथों में ले कर हाथ मेरे
हम कदम हो आप सा जो ज़िन्दगी की राह में
मंजिलों को छोड़ पीछे तय सफ़र करता रहूँ
Monday, September 6, 2010
ghazal
इस से बढ़ कर और भला गम क्या होगा
उम्मीदों ने तोड़ दिया दम क्या होगा
चारागर की आम दवाई से मेरे
ज़ख़्मी दिल का दर्द भला कम क्या होगा
सोच रही औलाद वसीयत से पहले
बूढ़े की जो सांस गयी थम क्या होगा
चिंता है फुटपाथ पे रहने वालों की
होगी जब बरसात झमाझम क्या होगा
पल भर को भी नींद नहीं आती मुझ को
सोचूँ सारी रात सहर दम क्या होगा
उम्मीदों ने तोड़ दिया दम क्या होगा
चारागर की आम दवाई से मेरे
ज़ख़्मी दिल का दर्द भला कम क्या होगा
सोच रही औलाद वसीयत से पहले
बूढ़े की जो सांस गयी थम क्या होगा
चिंता है फुटपाथ पे रहने वालों की
होगी जब बरसात झमाझम क्या होगा
पल भर को भी नींद नहीं आती मुझ को
सोचूँ सारी रात सहर दम क्या होगा
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