Monday, September 6, 2010

ghazal

इस से बढ़ कर और भला गम क्या होगा
उम्मीदों ने तोड़ दिया दम क्या होगा

चारागर की आम दवाई से मेरे
ज़ख़्मी दिल का दर्द भला कम क्या होगा

सोच रही औलाद वसीयत से पहले
बूढ़े की जो सांस गयी थम क्या होगा

चिंता है फुटपाथ पे रहने वालों की
होगी जब बरसात झमाझम  क्या होगा

पल भर को भी नींद नहीं आती मुझ को
सोचूँ सारी रात सहर दम क्या होगा

No comments:

Post a Comment