इस से बढ़ कर और भला गम क्या होगा
उम्मीदों ने तोड़ दिया दम क्या होगा
चारागर की आम दवाई से मेरे
ज़ख़्मी दिल का दर्द भला कम क्या होगा
सोच रही औलाद वसीयत से पहले
बूढ़े की जो सांस गयी थम क्या होगा
चिंता है फुटपाथ पे रहने वालों की
होगी जब बरसात झमाझम क्या होगा
पल भर को भी नींद नहीं आती मुझ को
सोचूँ सारी रात सहर दम क्या होगा
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