Tuesday, August 31, 2010

sach kahoon

ये तन औ ये लिबास यहीं छोड़ जाऊँगा
जो कुछ है मेरे पास यहीं छोड़ जाऊँगा

कोई न मेरे साथ में ही जाएगा वहां
सब  लोगों को उदास यहीं छोड़ जाऊँगा

भर भर के जाम जिस में पिए उम्रभर वही
खुशियों भरा गिलास यहीं छोड़ जाऊँगा

जाऊँगा मुस्कुराते हुए इस जहान से
रिश्तो  की सब खटास यहीं छोड़ जाऊँगा

पढ़ लेना मेरे शेर तुम्हे   याद आऊं जब 
ग़ज़लें   तुम्हारे पास यहीं छोड़ जाऊँगा

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