Tuesday, August 31, 2010

sach kahoon

ये तन औ ये लिबास यहीं छोड़ जाऊँगा
जो कुछ है मेरे पास यहीं छोड़ जाऊँगा

कोई न मेरे साथ में ही जाएगा वहां
सब  लोगों को उदास यहीं छोड़ जाऊँगा

भर भर के जाम जिस में पिए उम्रभर वही
खुशियों भरा गिलास यहीं छोड़ जाऊँगा

जाऊँगा मुस्कुराते हुए इस जहान से
रिश्तो  की सब खटास यहीं छोड़ जाऊँगा

पढ़ लेना मेरे शेर तुम्हे   याद आऊं जब 
ग़ज़लें   तुम्हारे पास यहीं छोड़ जाऊँगा

Monday, August 30, 2010

desh bhakti song

 ताजिंदगी वतन को शत शत नमन  करेंगे
निज प्राण से भी ज्यादा फिकरे वतन करेंगे
ऐ  मादरे वतन हम करते हैं तुझ   से वादा
इंसानियत के हित में नूतन सृजन करेंगे

विपदाओं में न हरगिज हारेंगे हौसला हम
होगा जो सब के हित में लेंगे वो फैसला हम
जुल्मत का ये अँधेरा बन कर रवि हरेंगे
इंसानियत के हित में

हम बीज एकता के बोयेंगे इस धरा में
उन्नत करेंगे मजहब ईमान से जहां में
जीवन सदा हो सुखमय ऐसा जतन करेंगे
इंसानियत के हित में

निज खून से सींच कर हम सुरभित करेंगे गुलशन
होंगी दिशाएं हर्षित सुख से भरेंगे दामन
यशगान तेरा मिलकर अहले वतन करेंगे
इंसानियत के हित में

सुन्दर ये आशियाना सारे जहां की दौलत
सब कुछ है हमने पाया केवल तेरी बदौलत
माथे पे रज लगा कर फ़खरे वतन करेंगे
इंसानियत के हित में

Thursday, August 26, 2010

ghazal

मोम की सूरत पिघलना सीख लो
गुफ्तगू का शीरी  लहजा सीख लो

कायदा पढना नहीं काफी मियां
कायदे से बात करना सीख लो

ज़िन्दगी की है बहुत मुश्किल डगर
दोस्तों काँटों  पे  चलना सीख लो

शोख लहरों सा मचलना छोड़ कर
शांत  सागर सा ठहरना सीख लो

छोड़ कर तुम आहनी अपनी रविश
वक़्त के सांचे में ढलना  सीख लो