Tuesday, April 23, 2013

dilli mein...ghazal

ये लगता हिजड़ों की है यहाँ सरकार दिल्ली में
कि नंगा नाच करती है हवस दिलदार दिल्ली में ...
तबाही का सबब है हर तरफ़ दहशत का मंज़र है
सुरक्षित है नहीं अब आप का घरबार दिल्ली में
बिखरने से बचा ले जो हमारे देश की इज्ज़त
नहीं ढूँढे से मिलता साहिबे किरदार दिल्ली में
रुदन है हर तरफ ही सब के चेहरे ग़म में डूबे हैं
कि जीना बेटियों का हो गया दुश्वार दिल्ली में
दिलों को रख दिया झिंजोड़ कर कुछ हादसों ने यूं
मची है हर तरफ अज्ञात हाहाकार दिल्ली में

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