मेरी हर ख्वाइश अधूरी रह
गई
ज़िन्दगी की जुल्फ उलझी रह गई
ज़ेहनो दिल में ठन गई जिस रोज़ से
नींद बस करवट बदलती रह गई
देह के बंधन को त्यागा रूह ने...
ख़ाक बाक़ी बस दो मुट्ठी रह गई
वो बसेरा खाली कर के चल दिए
नाम की तख्ती लटकती रह गई
एक अर्सा हो गया बिछड़े हुए
प्यार की खुश्बू महकती रह गई
ज़िन्दगी की जुल्फ उलझी रह गई
ज़ेहनो दिल में ठन गई जिस रोज़ से
नींद बस करवट बदलती रह गई
देह के बंधन को त्यागा रूह ने...
ख़ाक बाक़ी बस दो मुट्ठी रह गई
वो बसेरा खाली कर के चल दिए
नाम की तख्ती लटकती रह गई
एक अर्सा हो गया बिछड़े हुए
प्यार की खुश्बू महकती रह गई
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