Sunday, May 31, 2015

paryawaran ghazal

लोग अंधाधुंध कैसे काट ते जाते शजर
पूछते हैं ये परिंदे जाएं तो जाएं किधर
नाज़ है जिस पर तुझे सपनों का ये तेरा महल
जलजला आया तो पलभर में ही जायेगा बिखर
आदमी ने स्वर्ग सी धरती बना डाली नरक...
हो हवा पानी कि मिट्टी सब में घोला है ज़हर
कुछ न ले कर आया था कुछ भी न लेकर जायेगा
मारा मारा फिर रहा है फ़िर भी देखो हर बशर
अपना जीवन उसने दूभर है बना डाला अजय
जिसको दौलत के अलावा कुछ नहीं आता नज़र

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