लोग अंधाधुंध कैसे काट ते जाते शजर
पूछते हैं ये परिंदे जाएं तो जाएं किधर
नाज़ है जिस पर तुझे सपनों का ये तेरा महल
जलजला आया तो पलभर में ही जायेगा बिखर
आदमी ने स्वर्ग सी धरती बना डाली नरक...
हो हवा पानी कि मिट्टी सब में घोला है ज़हर
कुछ न ले कर आया था कुछ भी न लेकर जायेगा
मारा मारा फिर रहा है फ़िर भी देखो हर बशर
अपना जीवन उसने दूभर है बना डाला अजय
जिसको दौलत के अलावा कुछ नहीं आता नज़र
पूछते हैं ये परिंदे जाएं तो जाएं किधर
नाज़ है जिस पर तुझे सपनों का ये तेरा महल
जलजला आया तो पलभर में ही जायेगा बिखर
आदमी ने स्वर्ग सी धरती बना डाली नरक...
हो हवा पानी कि मिट्टी सब में घोला है ज़हर
कुछ न ले कर आया था कुछ भी न लेकर जायेगा
मारा मारा फिर रहा है फ़िर भी देखो हर बशर
अपना जीवन उसने दूभर है बना डाला अजय
जिसको दौलत के अलावा कुछ नहीं आता नज़र
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