हाँ बहुत ही ख़ुशनुमा है ज़िन्दगी अभी
इश्क़ के चराग़ से है रौशनी अभी
ज़ेहन में है बरक़रार ताज़गी अभी
लुत्फ़ दे रही है मुझ को शाइरी अभी
इक के बाद इक नदी को पी रहा हूँ मैं
मिट न पाई दोस्तो ये तिश्नगी अभी
फेसबुक पे आप का कमेंट देख कर
थम गई थी नब्ज़ जो वो चल पड़ी अभी
इश्क़ के चराग़ से है रौशनी अभी
ज़ेहन में है बरक़रार ताज़गी अभी
लुत्फ़ दे रही है मुझ को शाइरी अभी
इक के बाद इक नदी को पी रहा हूँ मैं
मिट न पाई दोस्तो ये तिश्नगी अभी
फेसबुक पे आप का कमेंट देख कर
थम गई थी नब्ज़ जो वो चल पड़ी अभी