मुझ पे अहसान इतना किया कीजिए
मुस्कुरा कर कभी तो मिला कीजिए
अपनी हद में ये रहने का आदी नहीं
मनचला है ये दिल इसका क्या कीजिए
मुझ को फिर देना है इश्क़ का इम्तेहां
मेरे हक़ में ऐ लोगो दुआ कीजिये
जिस्म ही पर निगाहें हैं अटकी हुईं
हुस्ने किरदार को भी पढ़ा कीजिए
हर कोई तो भरोसे के क़ाबिल नहीं
इतनी जल्दी न सब से खुला कीजिए
आपको एक ही मश्विरा है मेरा
हर किसी से नहीं मश्विरा कीजिए
क़ैद में इसकी हूँ एक मुद्दत से मैं
मुझ को इस जिस्म से अब जुदा कीजिये
मुस्कुरा कर कभी तो मिला कीजिए
अपनी हद में ये रहने का आदी नहीं
मनचला है ये दिल इसका क्या कीजिए
मुझ को फिर देना है इश्क़ का इम्तेहां
मेरे हक़ में ऐ लोगो दुआ कीजिये
जिस्म ही पर निगाहें हैं अटकी हुईं
हुस्ने किरदार को भी पढ़ा कीजिए
हर कोई तो भरोसे के क़ाबिल नहीं
इतनी जल्दी न सब से खुला कीजिए
आपको एक ही मश्विरा है मेरा
हर किसी से नहीं मश्विरा कीजिए
क़ैद में इसकी हूँ एक मुद्दत से मैं
मुझ को इस जिस्म से अब जुदा कीजिये
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