Sunday, November 13, 2011
ghazal
भावना को शब्द का आकार दे
लेखनी को चेतना की धार दे
श्रेय पथ पर अग्रसर होता रहूँ
आचरण को सत्य का आधार दे
मानसिक शुचिता अनूठी धीरता
आत्म संयम का मुझे उपहार दे
शायरों में नाम मेरा हो शुमार
कुछ अनूठे तू मुझे अशआर दे
हम नहीं छोड़ेंगे राहे रास्त को
तू डगर आसान या दुश्वार दे
है मुझे मंजूर तेरा फैसला
गुल अता कर या मुझे तू खार दे
ghazal
जीने का हर सामान है कोई कमी नहीं
जाने क्यूँ फिर भी ज़िन्दगी में इक ख़ुशी नहीं
इस ज़िन्दगी के वास्ते क्या क्या नहीं किया
बढती हवस इसकी मगर घटती कभी नहीं
इस ज़िन्दगी के मायने आये नहीं समझ
जब तक मेरे जेहन में हुई रौशनी नहीं
हर शेर में ढाला है इक इक तज्रिबात को
है ज़िन्दगी का फलसफा ये शायरी नहीं
सच बात तुझ से कहता हूँ मत मानना बुरा
ए ज़िन्दगी तू तो किसी भी काम की नहीं
ghazal
जिंदगी जीने का तब तक कायदा आया न था
खाईओं को दिल की जब तक पाटना आया न था
दुसरे के ऐब हम को तब तलक दिखते रहे
सामने जब तक हमारे आइना आया न था
कुर्बतों की अहमियत को हम नहीं पाए समझ
दरमियाँ जब तक हमारे फासला आया न था
जिस दिए की लो बचाई हाथ उस से जल गया
ठीक से हम ही को शायद ढापना आया न था
देर तक अज्ञात खुशियों से रहे महरूम हम
जिंदगी में ठीक से गम पालना आया न था
ghazal
jine ka har samaan hai koi kami nahi.n
jane kyun phir bhi zindagi mei.n ik khushi nahi.n
is zindagi ke waste kya kya nahi.n kiya
badhti hawas iski magar ghat ti kabhi nahi.n
is zindagi ke mayne aye nahi.n samajh
jab tak mere jehan mei.n hui roshni nahi.n
har sher mei.n dhaala hai ik ik tazribat ko
hai zindagi ka falsafa ye shayari nahi.n
sach baat tujh se kahta hu.n mat maan na bura
e zindagi tu to kisi bhi kaam ki nahi.n
ghazal
ankho.n se aansoo chalkaye.n hum kab tak
tasveero.n se dil bahlaye.n hum kab tak
toote dil ke zakhm chipaye.n hum kab tak
adhro.n par muskaan sajaye.n hum kab tak
khudgarzo.n ki dunya mei.n sacche jhoote
sambandho.n ka bojh uthaye.n hum kab tak
oob gaye hai.n roz yahi karte karte
jeevan ka ehsaan uthaye.n hum kab tak
jug walo.n ko khush rakhne ki khatir hi
sacchi jhooti baat banaye.n hum kab tak
ghazal
दिल लगाने के नतीजे सब मुझे मालूम हैं
खूबसूरत बेवफाओं के पते मालूम हैं
आदतों से आपकी वाकिफ हूँ मैं अच्छी तरह
मुझ को सारे कारनामे आप के मालूम हैं
बस ज़रा सी कोशिशों की ही ज़रुरत है फकत
कामयाबी के मुझे सब रास्ते मालूम हैं
हँसते हँसते गम उठाता हूँ गिला करता नहीं
जिंदगी जीने के मुझ को कायदे मालूम हैं
और कुछ मालूम चाहे हो न हो अज्ञात को
जिंदगानी की ग़ज़ल के काफिये मालूम हैं
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