Sunday, November 13, 2011

ghazal

भावना को शब्द का आकार दे
लेखनी को चेतना की धार दे
श्रेय पथ पर अग्रसर होता रहूँ
आचरण को सत्य का आधार दे
मानसिक शुचिता अनूठी धीरता
आत्म संयम का मुझे उपहार दे
शायरों में नाम मेरा हो शुमार
कुछ अनूठे तू मुझे अशआर दे
हम नहीं छोड़ेंगे राहे रास्त को
तू डगर आसान या दुश्वार दे
है मुझे मंजूर तेरा फैसला
गुल अता कर या मुझे तू खार दे

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