Sunday, November 13, 2011

ghazal

जीने का हर सामान है कोई कमी नहीं
जाने क्यूँ फिर भी ज़िन्दगी में इक ख़ुशी नहीं
इस ज़िन्दगी के वास्ते क्या क्या नहीं किया
बढती हवस इसकी मगर घटती कभी नहीं
इस ज़िन्दगी के मायने आये नहीं समझ
जब तक मेरे जेहन में हुई रौशनी नहीं
हर शेर में ढाला है इक इक तज्रिबात को
है ज़िन्दगी का फलसफा ये शायरी नहीं
सच बात तुझ से कहता हूँ मत मानना बुरा
ए ज़िन्दगी तू तो किसी भी काम की नहीं

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