जीने का हर सामान है कोई कमी नहीं
जाने क्यूँ फिर भी ज़िन्दगी में इक ख़ुशी नहीं
इस ज़िन्दगी के वास्ते क्या क्या नहीं किया
बढती हवस इसकी मगर घटती कभी नहीं
इस ज़िन्दगी के मायने आये नहीं समझ
जब तक मेरे जेहन में हुई रौशनी नहीं
हर शेर में ढाला है इक इक तज्रिबात को
है ज़िन्दगी का फलसफा ये शायरी नहीं
सच बात तुझ से कहता हूँ मत मानना बुरा
ए ज़िन्दगी तू तो किसी भी काम की नहीं
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