जिंदगी जीने का तब तक कायदा आया न था
खाईओं को दिल की जब तक पाटना आया न था
दुसरे के ऐब हम को तब तलक दिखते रहे
सामने जब तक हमारे आइना आया न था
कुर्बतों की अहमियत को हम नहीं पाए समझ
दरमियाँ जब तक हमारे फासला आया न था
जिस दिए की लो बचाई हाथ उस से जल गया
ठीक से हम ही को शायद ढापना आया न था
देर तक अज्ञात खुशियों से रहे महरूम हम
जिंदगी में ठीक से गम पालना आया न था
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