जिंदगी से क्या मिला कुछ भी नहीं
किसने हम को क्या दिया कुछ भी नहीं
सिर पे मत लादे फिरो अपनी अना
इस से बढ़ कर मशविरा कुछ भी नहीं
शेर कहने का है बस हम को नशा
और अपना मशगला कुछ भी नहीं
जो न हो चर्चा तेरी रानाई का
फिर ग़ज़ल का मर्तबा कुछ भी नहीं
इश्क़ तो अज्ञात ऐसा रोग है
दुनया में जिसकी दवा कुछ भी नही
किसने हम को क्या दिया कुछ भी नहीं
सिर पे मत लादे फिरो अपनी अना
इस से बढ़ कर मशविरा कुछ भी नहीं
शेर कहने का है बस हम को नशा
और अपना मशगला कुछ भी नहीं
जो न हो चर्चा तेरी रानाई का
फिर ग़ज़ल का मर्तबा कुछ भी नहीं
इश्क़ तो अज्ञात ऐसा रोग है
दुनया में जिसकी दवा कुछ भी नही
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