Thursday, July 12, 2012

कैसे हुआ आसान सफर देख रहा हूँ
मैं माँ की दुआओं का असर देख रहा हूँ
ये रात गुजर जाएगी कुछ पल में यकीनन
मैं आती हुई एक सहर देख रहा हूँ
हो खैर कि ये कैसा मुहब्बत का असर है
हर शै में तुझे जाने जिगर देख रहा हूँ
हिन्दी है मेरी माँ तो है उर्दू मेरी मौसी
तहज़ीब का मैं फलता शजर देख रहा हूँ
अज्ञात ये क्या कम है मुहब्बत में किसी की
आँखें हैं मेरी बंद मगर देख रहा हूँ

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