दर्द से उपजा हुआ इक गीत लिख
हर्फे नफरत को मिटा कर प्रीत लिख
प्रेरणा से पूर्ण हो ग़ज़लें तेरी
प्राण जो चेतन करे वो गीत लिख
आजमाना चाहता है गर हुनर
आज के परिवेश के विपरीत लिख
पैरवी कर लेखनी से सत्य की
झूठ से हो कर नहीं भयभीत लिख
शिल्प का सौन्दर्य केवल मत दिखा
भावना को मथ के तू नवनीत लिख
हर्फे नफरत को मिटा कर प्रीत लिख
प्रेरणा से पूर्ण हो ग़ज़लें तेरी
प्राण जो चेतन करे वो गीत लिख
आजमाना चाहता है गर हुनर
आज के परिवेश के विपरीत लिख
पैरवी कर लेखनी से सत्य की
झूठ से हो कर नहीं भयभीत लिख
शिल्प का सौन्दर्य केवल मत दिखा
भावना को मथ के तू नवनीत लिख
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