Thursday, July 12, 2012

दर्द से उपजा हुआ इक गीत लिख
हर्फे नफरत को मिटा कर प्रीत लिख
प्रेरणा से पूर्ण हो ग़ज़लें तेरी
प्राण जो चेतन करे वो गीत लिख
आजमाना चाहता है गर हुनर
आज के परिवेश के विपरीत लिख
पैरवी कर लेखनी से सत्य की
झूठ से हो कर नहीं भयभीत लिख
शिल्प का सौन्दर्य केवल मत दिखा
भावना को मथ के तू नवनीत लिख

No comments:

Post a Comment