फरीदो सूर की नगरी फ़रीदाबाद क्या कहने
इसी मिट्टी ने जन्मे हैं अजब उस्ताद क्या कहने
कभी जब देखता कोई ये प्यारी सूर की नगरी
तो बरबस आ ही जाते हैं कन्हैया याद क्या कहने
बसे थे पाक से आ कर हुए थे घर से जो बेघर
सहारा पा के वो तेरा हुए आबाद क्या कहने
तेरी शौहरत है दुनिया में बहुत से कारखानो से
सभी सुन कर के कहते हैं तेरी रूदाद क्या कहने
हुए फनकार इक से इक बहुत शौहरत मिली जिन को
अभी तक याद करते है उन्हें नक्काद क्या कहने
इसी मिट्टी ने जन्मे हैं अजब उस्ताद क्या कहने
कभी जब देखता कोई ये प्यारी सूर की नगरी
तो बरबस आ ही जाते हैं कन्हैया याद क्या कहने
बसे थे पाक से आ कर हुए थे घर से जो बेघर
सहारा पा के वो तेरा हुए आबाद क्या कहने
तेरी शौहरत है दुनिया में बहुत से कारखानो से
सभी सुन कर के कहते हैं तेरी रूदाद क्या कहने
हुए फनकार इक से इक बहुत शौहरत मिली जिन को
अभी तक याद करते है उन्हें नक्काद क्या कहने
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