पिता के दक्ष हाथों ने मुझे साँचे में ढाला है
मुझे कुलदीप बन घर में सदा करना उजाला है
मेरे नखरे उठाये हैं बड़े नाज़ों से पाला है
बिठाया मुझको कन्धों पर हवाओं में उछाला है
थमा कर अपनी ऊँगली को सिखाया जिसने था चलना...
बनूँगा उसकी मैं लाठी मुझे जिसने संभाला है
कि जिसने खू पसीने से सभी बच्चों को पाला था
उसी की ख्वाइशों पर अब पड़ा मकड़ी का जाला है
सभी के वास्ते त्यौहार पर आये नए कपडे
पिता के शानो पर लेकिन पुराना सा दुशाला है
मुझे कुलदीप बन घर में सदा करना उजाला है
मेरे नखरे उठाये हैं बड़े नाज़ों से पाला है
बिठाया मुझको कन्धों पर हवाओं में उछाला है
थमा कर अपनी ऊँगली को सिखाया जिसने था चलना...
बनूँगा उसकी मैं लाठी मुझे जिसने संभाला है
कि जिसने खू पसीने से सभी बच्चों को पाला था
उसी की ख्वाइशों पर अब पड़ा मकड़ी का जाला है
सभी के वास्ते त्यौहार पर आये नए कपडे
पिता के शानो पर लेकिन पुराना सा दुशाला है