कल शाम जिंदगी से मुलाकात हो गयी
क्या असलियत है उस की मुझे ज्ञात हो गयी
उस से जरा सा वक़्त ही माँगा था भीख में
वो लाल पीली मुझ से बिना बात हो गयी
अपना समझ के डांट पिलाई थी उसने जो
मेरे लिए वो डांट भी सौगात हो गयी
मेरी ख़ुशी को देख कर तकदीर जल गयी
अज्ञात जिस का दर था वही बात हो गयी
फिर रूह लौट आयी है इक लाश में यहाँ
अज्ञात ये तो सच में करामात हो गयी
क्या असलियत है उस की मुझे ज्ञात हो गयी
उस से जरा सा वक़्त ही माँगा था भीख में
वो लाल पीली मुझ से बिना बात हो गयी
अपना समझ के डांट पिलाई थी उसने जो
मेरे लिए वो डांट भी सौगात हो गयी
मेरी ख़ुशी को देख कर तकदीर जल गयी
अज्ञात जिस का दर था वही बात हो गयी
फिर रूह लौट आयी है इक लाश में यहाँ
अज्ञात ये तो सच में करामात हो गयी