Sunday, December 18, 2011

ghazal


कूच ए इश्क से ये बार बार गुजरी है
ज़िन्दगी अपनी सदा खुशगवार गुजरी है

वो लगाते हैं जो चक्कर तुम्हारी गलियों के
इक यही बात हमें नागवार गुजरी है
...
क्या बताएं कि गुजरी है ज़िन्दगी कैसे
बिन तुम्हारे ये बहुत बेकरार गुजरी है

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