घर घर चूल्हा चोका करती करती सूट सिलाई माँ
बच्चों खातिर जोड़ रही है देखो पाई पाई माँ
बाबूजी की आमद भी कम ऊपर से ये महंगाई
टूटे चश्मे से बामुश्किल करती है तुरपाई माँ
...
सहते सहते सारे घर की बढती जिम्मेवारी को
घटते घटते आज बची है केवल एक तिहाई माँ
टीका कुंडल हसली कंगन तगड़ी नथ बिछुए चुटकी
बेटी की शादी की खातिर सब गिरवी रख आई माँ
दर्ज़न भर लोगों का कुनबा फिर भी था साँझा चूल्हा
मिल जुल कर रहती थी घर में दादी चाची ताई माँ
बच्चों खातिर जोड़ रही है देखो पाई पाई माँ
बाबूजी की आमद भी कम ऊपर से ये महंगाई
टूटे चश्मे से बामुश्किल करती है तुरपाई माँ
...
सहते सहते सारे घर की बढती जिम्मेवारी को
घटते घटते आज बची है केवल एक तिहाई माँ
टीका कुंडल हसली कंगन तगड़ी नथ बिछुए चुटकी
बेटी की शादी की खातिर सब गिरवी रख आई माँ
दर्ज़न भर लोगों का कुनबा फिर भी था साँझा चूल्हा
मिल जुल कर रहती थी घर में दादी चाची ताई माँ
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