देखने में तो भले छोटा है वो
पर इरादे का बड़ा पक्का है वो
जात से अपनी बहुत पुख्ता है वो
आम जन का पेशवा अन्ना है वो
कौन कहता है की गाँधी मर गया
पर इरादे का बड़ा पक्का है वो
जात से अपनी बहुत पुख्ता है वो
आम जन का पेशवा अन्ना है वो
कौन कहता है की गाँधी मर गया
बन के अन्ना आज भी जिंदा है वो
कुछ अलग ही बात है उस शख्स में
आम इंसां है मगर यकता है वो
रौशनी करना ही उसका ध्येय है
दीप बन कर राह में जलता है वो
कुछ अलग ही बात है उस शख्स में
आम इंसां है मगर यकता है वो
रौशनी करना ही उसका ध्येय है
दीप बन कर राह में जलता है वो
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