Friday, July 9, 2021

रब की मेहर से

 ज़र्रे से आफ़ताब हुए रब की मेहर से

जीवन में कामयाब हुए रब की मेहर से


हम दश्ते आरज़ू में थे जिन से घिरे हुए

सब दूर वो अज़ाब हुए रब की मेहर से


बेमंज़री थी पहले जहाँ अब उसी जगह

हमराह हैं गुलाब हुए रब की मेहर से


मेहनत के साथ थोड़ी सी किस्मत भी साथ थी 

हासिल कई ख़िताब हुए रब की मेहर से


मेरी कहाँ बिसात की मैं शेर कह सकूं

अशआर लाजवाब हुए रब की मेहर से

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