Friday, July 9, 2021

पर्यावरण

 गुलशन को रेगज़ार किये जा रहे हैं हम

क़ुदरत पे क्यों ये वार किए जा रहे हैं हम


आबो हवा ये जीने के माफ़िक नहीं बचे

जीवन पे यूँ प्रहार किए जा रहे हैं हम


पर्यावरण का जिस से बिगड़ता है संतुलन

वो काम बार - बार किये जा रहे हैं हम


धरती पे खुल के साँस भी लेना मुहाल है 

ये कैसा कारोबार किये जा रहे हैं हम


'अज्ञात' हम को कब ये भला आएगी समझ

ख़ुद अपना ही शिकार किये जा रहे हैं हम

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