गुलशन को रेगज़ार किये जा रहे हैं हम
क़ुदरत पे क्यों ये वार किए जा रहे हैं हम
आबो हवा ये जीने के माफ़िक नहीं बचे
जीवन पे यूँ प्रहार किए जा रहे हैं हम
पर्यावरण का जिस से बिगड़ता है संतुलन
वो काम बार - बार किये जा रहे हैं हम
धरती पे खुल के साँस भी लेना मुहाल है
ये कैसा कारोबार किये जा रहे हैं हम
'अज्ञात' हम को कब ये भला आएगी समझ
ख़ुद अपना ही शिकार किये जा रहे हैं हम
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