हम उनकी मुहब्बत के तलबगार नहीं हैं
दुनिया में जो भी लोग वफ़ादार नहीं हैं
रखते हैं तवक़्क़ो वे यहाँ सब से मदद की
जो लोग किसी के भी मददगार नहीं हैं
हम ने सभी के वास्ते माँगी हैं दुआएँ
हम तो किसी की राह की दीवार नहीं हैं
चीज़ें हैं सभी काम की जो भी हैं जहां में
बेकार जिन्हें कहते हैं बेकार नहीं हैं
बीमार हैं जो इश्क़ के ज़िंदा हैं वही लोग
मुर्दा हैं वे जो इश्क़ के बीमार नहीं हैं
वो काम जिन्हें करने से घबरा रहे हो तुम
मुश्किल हैं मगर इतने भी दुश्वार नहीं हैं
इस ज़ीस्त को हम अपनी ही शर्तों पे जियेंगे
दुनिया! तेरी शर्तें हमें स्वीकार नहीं हैं
हम रात को दिन, दिन को कभी रात न कहते
हस्सास हैं, झूठे के तरफ़दार नहीं हैं
बुनियाद ही जिसकी हो टिकी झूठ पे 'अज्ञात'
उस रिश्ते के बचने के तो आसार नहीं हैं
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