किसने कहा है तुम से मैं शाइर हूँ बेमिसाल
फ़नकार हूँ कि कोई मुसव्विर हूँ बेमिसाल
अफ़सुर्दगी बिछी है जहाँ दूर दूर तक
उस राहे इश्क़ का मैं मुसाफ़िर हूँ बेमिसाल
परवाज़ ऊंची मेरे तख़य्युल की देख कर
कहने लगे हैं लोग मैं ताइर हूँ बेमिसाल
सौदे में इश्क़ के न मुनाफ़ा हुआ कभी
कैसे भला ये कह दूं मैं ताजिर हूँ बेमिसाल
मुझ को भी तो पता चले आख़िर वो कौन है
किसने कहा है तुम से मैं शाइर हूँ बेमिसाल
मुसव्विर। चित्रकार
अफ़सुर्दगी। बेचैनी, परेशानी
तख़य्युल कल्पना
ताइर पंछी
ताजिर व्यापारी
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